शुक्रवार, दिसंबर 11, 2009

पाकिस्तान को चीन से सीखना चाहिए

" धर्म की राजनीति " और " राज्य-नीति में धर्म " दोनों ही स्थिति किसी देश की अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा होती है और उस देश के लिए चुनौती बन जाती है.
भारत में धार्मिक निष्ठा प्रत्येक नागरिक का व्यक्तिगत होता है अर्थात धर्मं की स्वतंत्रता भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार में शामिल है. इसी तरह देश की अखंडता, एकता और संप्रभुता बनाये रखना प्रत्येक नागरिक का परम कर्त्तव्य है.महाभारत में भी श्री कृष्ण ने कहा है की -कर्म किये जा फल की चिंता मत कर अर्थात प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का निष्ठा से पालन करते रहना चाहिए उसे उसके सारे अधिकार स्वभावतः प्राप्त होने लगेंगे।
एक बार हमारे इतिहास के एक शिक्षक ने हमें एक कहानी सुनाई की - एक बार एक चीनी लड़के से पुछा गया की उसकी सबसे ज्यादा आस्था किसमें है ? तब उस लड़के ने जवाब दिया की महात्मा बुद्ध में। तब उससे पूछा गया की यदि महात्मा बुद्ध तुम्हारे देश के खिलाफ युद्ध छेड़ देंगे तो तुम क्या करोगे? तब उसने जवाब दिया की मैमहात्मा बुद्ध के खिलाफ युद्ध करूँगा। यही सवाल जब एक पाकिस्तानी लड़के से पूछा गया की यदि मुह्हमद पैगम्बर या उनकी सेना तुम्हारे देश के खिलाफ विद्रोह छेड़ दें तो तुम क्या करोगे ? उस पाकिस्तानी मुस्लमान लड़के ने जवाब दिया की पैगम्बर साहब ऐसा करेंगे ही नही। जब उससे दुबारा पूछा गया की मन लो की ऐसा हो गया तो तब ...? उस लड़के ने झुंझलाकर कहा की हम किसी कीमत पर ये मानने को तैयार ही नही हूँ की मोह्हमद साहब ऐसा कर सकते हैं।
"धर्म में आस्था अच्छी बात है, पर
'आँखों के अंधे' बनना अच्छा नहीं होता "
ऐसा ही कुछ आज- कल एशिया की राजनीति में हो रहा है। जब दलाई लामा तिब्बत और अरुणांचल की यात्रा पर आते हैं तो चीन की तरफ़ से बयानबाज़ी होनी शुरू हो जाती है। चूँकि चीन अरुणांचल प्रदेश और तिब्बत को चीन का अहम् हिस्सा मानती है और दलाई लामा का यह कहना है की अरुणांचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है
चूँकि यंहा पर चीन का देश की राजनीति से धर्म को अलग मानना बहुत ही अच्छा उदाहरण देखने को मिलता है भारत में हुए हल ही के लोक सभा चुनाव में यंहा की जनता ने भी धर्मं के नाम पर राजनीति करने वालो को बाहर का रास्ता दिखा दिया है अब बारी पाकिस्तान सरकार और वंहा की जनता की है, की वे वंहा धर्मं या जिहाद के नाम पर पनप रहे आतंकवाद को जो पाकिस्तान के संप्रभुता पर खतरा मंडरा रही है उनसे निपटती है या पड़ोसियों पर दोषारोपण करके झूठे बयानबाजी से ताल देती है
यदि ऐसा ही होता रहा तो वंहा "तैय्यबा की सेना" (लशकर- ऐ- तैय्यबा ), "मोह्हमद के लोग" (जैश- ऐ मोह्हमद ), तथा "छात्रों का समूह" (तालिबान ) इत्यादि के द्वारा पाकिस्तान का विनाश बहुत ही जल्द हो जायेगा
पाकिस्तान की सरकार को चाहिए की चीन से परमाणु हथियारों और बैलेस्टिक मिसाईलों के जगह पर कुछ अपने देश के भविष्य के बारे में सिख ले साथ ही साथ धर्मं को आस्था का विषयबनाकर रखे इसे राजनीती से दूर ही रखे और आतंकवादिओं पर कड़ी करवाई करे

1 टिप्पणी:

  1. it is a great article on the very unique topic..i like it so much.
    the way of thinking ... tremendous.
    i hope u'll carry the writting on such kind of different topics.

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