इस बार के बजट में किसी बड़े “Big-Bang Reform” के बजाय पहले से घोषित नीतियों के समेकन (Consolidation) पर ज़ोर देखने को मिलता है। यह संकेत देता है कि सरकार अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।
बजट की संवैधानिक और संस्थागत पृष्ठभूमि
भारतीय संविधान में ‘बजट’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। अनुच्छेद 112 इसे Annual Financial Statement के रूप में परिभाषित करता है, जबकि अनुच्छेद 114 के अंतर्गत विनियोग विधेयक के माध्यम से सरकार को Consolidated Fund of India से व्यय की अनुमति मिलती है।
यह प्रक्रिया दर्शाती है कि बजट केवल आर्थिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक जवाबदेही का भी प्रतीक है।
बजट 2026–27 की दार्शनिक पृष्ठभूमि
वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट का केंद्रीय विचार युवा-शक्ति प्रेरित विकास है। सरकार ने गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों को विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। बजट का दृष्टिकोण तीन प्रमुख कर्तव्यों पर आधारित है—
तीव्र आर्थिक विकास,
नागरिकों की आकांक्षाओं की पूर्ति, तथा
समावेशी विकास (सबका साथ, सबका विकास)।
बजट 2026–27 के छह भू-आर्थिक स्तंभ
1. सतत आर्थिक विकास और मैन्युफैक्चरिंग
2. MSMEs: घरेलू अर्थव्यवस्था का इंजन
- MSMEs न केवल रोजगार सृजन बल्कि आर्थिक विकेंद्रीकरण का भी माध्यम हैं।
3. सेवा क्षेत्र और ऑरेंज इकॉनमी
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मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के लिए 5 हब
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केयर-गिवर्स और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स का प्रशिक्षण
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कंटेंट क्रिएटर्स और डिजाइन इकोनॉमी को बढ़ावा
यह दिखाता है कि भारत अब केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
4. अवसंरचना: ग्रोथ की नींव
नए Dedicated Freight Corridor, 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग, और Purvodaya Scheme (East Coast Industrial Corridor) जैसे कदम लॉजिस्टिक्स लागत घटाकर औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देंगे। टियर-2 और टियर-3 शहरों पर केंद्रित शहरीकरण नीति संतुलित क्षेत्रीय विकास में सहायक होगी।
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पूर्वोदय योजना यह निवेश भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता और रणनीतिक कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करेगा।
5. जन-केंद्रित विकास
6. विश्वास-आधारित शासन और ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस
Overseas Tours, शिक्षा, दवाइयों पर TCS में कटौती
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सरल टैक्स कंप्लायंस
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Foreign Asset Disclosure Window
इसका उद्देश्य निवेश और व्यापार के लिए विश्वास आधारित वातावरण तैयार करना है।
राजकोषीय दृष्टिकोण (Fiscal Outlook)
सरकार ने वित्तीय घाटे को 2026–27 में 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। ऋण-जीडीपी अनुपात को मध्यम अवधि में 50% (Debt-to-GDP Ratio: 55.6%) के आसपास लाने की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए राज्यों को 41% कर-हिस्सेदारी देना सहकारी संघवाद को सुदृढ़ करता है।
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यह संकेत देता है कि सरकार Fiscal Prudence और Growth Push के बीच संतुलन साध रही है।
निष्कर्ष: Geo-Economics के नजरिए से
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वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब
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सेवा आधारित ज्ञान अर्थव्यवस्था
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और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ाता है।

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