Sunday, February 01, 2026

भारत का केंद्रीय बजट 2026–27: भारत की भू-आर्थिक रणनीति का खाका


हर वर्ष 1 फरवरी को प्रस्तुत होने वाला भारत का केंद्रीय बजट केवल आय–व्यय का दस्तावेज़ नहीं होता, बल्कि यह सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं, रणनीतिक सोच और भू-आर्थिक (Geo-Economic) दिशा को भी स्पष्ट करता है। बजट 2026–27 भी इसी क्रम में भारत की विकास यात्रा में स्थिरता, संरचनात्मक सुधार और दीर्घकालिक रणनीति को केंद्र में रखता है।

इस बार के बजट में किसी बड़े “Big-Bang Reform” के बजाय पहले से घोषित नीतियों के समेकन (Consolidation) पर ज़ोर देखने को मिलता है। यह संकेत देता है कि सरकार अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बजट की संवैधानिक और संस्थागत पृष्ठभूमि

भारतीय संविधान में ‘बजट’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। अनुच्छेद 112 इसे Annual Financial Statement के रूप में परिभाषित करता है, जबकि अनुच्छेद 114 के अंतर्गत विनियोग विधेयक के माध्यम से सरकार को Consolidated Fund of India से व्यय की अनुमति मिलती है।

यह प्रक्रिया दर्शाती है कि बजट केवल आर्थिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक जवाबदेही का भी प्रतीक है।

बजट 2026–27 की दार्शनिक पृष्ठभूमि

वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट का केंद्रीय विचार युवा-शक्ति प्रेरित विकास है। सरकार ने गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों को विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। बजट का दृष्टिकोण तीन प्रमुख कर्तव्यों पर आधारित है—

  1. तीव्र आर्थिक विकास,

  2. नागरिकों की आकांक्षाओं की पूर्ति, तथा

  3. समावेशी विकास (सबका साथ, सबका विकास)।

बजट 2026–27 के छह भू-आर्थिक स्तंभ

1. सतत आर्थिक विकास और मैन्युफैक्चरिंग

बजट 2026–27 में मैन्युफैक्चरिंग को Strategic Geo-Economic Tool के रूप में विकास का आधार माना गया है। इसके अंतर्गत India Semiconductor Mission 2.0, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, बायो-फार्मा तथा एयरक्राफ्ट निर्माण को प्रोत्साहन दिया गया है।
यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते के बाद इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग, और टेक्सटाइल निर्यात की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र पर विशेष बल दिया गया है। कर सुधारों के माध्यम से कस्टम ड्यूटी में छूट और निर्यात समय-सीमा में वृद्धि से घरेलू विनिर्माण को प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया गया है।
EU–India Trade Deal के बाद टेक्सटाइल सेक्टर को 0% ड्यूटी का लाभ मिलने से भारत की वैश्विक वैल्यू चेन में स्थिति मजबूत हो सकती है।

2. MSMEs: घरेलू अर्थव्यवस्था का इंजन

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) को भारतीय अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन माना गया है। ₹10,000 करोड़ के SME Growth Fund तथा आत्मनिर्भर भारत कोष के विस्तार से एमएसएमई को पूंजी और पेशेवर सहायता प्रदान की जाएगी। टियर-2 और टियर-3 शहरों में Compliance Support Ecosystem विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है

  • MSMEs न केवल रोजगार सृजन बल्कि आर्थिक विकेंद्रीकरण का भी माध्यम हैं।

3. सेवा क्षेत्र और ऑरेंज इकॉनमी

सेवा क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, आयुष, खेल और ऑरेंज इकॉनमी को विकसित भारत के प्रमुख चालक के रूप में देखा गया है। मेडिकल टूरिज्म, केयर-इकोनॉमी और कंटेंट क्रिएशन से रोजगार सृजन की व्यापक संभावनाएँ उत्पन्न होंगी। सेवा क्षेत्र को Viksit Bharat का Core Driver माना गया है:
  • मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के लिए 5 हब

  • केयर-गिवर्स और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स का प्रशिक्षण

  • कंटेंट क्रिएटर्स और डिजाइन इकोनॉमी को बढ़ावा

यह दिखाता है कि भारत अब केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।

4. अवसंरचना: ग्रोथ की नींव

बजट 2026–27 में कैपिटल एक्सपेंडिचर ₹12.2 लाख करोड़ निर्धारित किया गया है, जो 2014–15 की तुलना में छह गुना से अधिक है।
नए Dedicated Freight Corridor, 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग, और Purvodaya Scheme (East Coast Industrial Corridor) जैसे कदम लॉजिस्टिक्स लागत घटाकर औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देंगे। टियर-2 और टियर-3 शहरों पर केंद्रित शहरीकरण नीति संतुलित क्षेत्रीय विकास में सहायक होगी।
  • पूर्वोदय योजना  यह निवेश भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता और रणनीतिक कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करेगा।

5. जन-केंद्रित विकास

बजट में Self-Help Group Entrepreneur Marts, दिव्यांग कौशल योजनाएँ, पूर्वी भारत में NIMHANS-II, तथा जिला अस्पतालों में ट्रॉमा केयर केंद्रों की स्थापना जैसे प्रावधान शामिल हैं। ये पहलें सामाजिक न्याय, मानव विकास और समावेशी वृद्धि को मजबूत करती हैं। यह बजट विकास को केवल GDP तक सीमित नहीं रखता, बल्कि सामाजिक समावेशन को भी महत्व देता है।

6. विश्वास-आधारित शासन और ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस 

  • Overseas Tours, शिक्षा, दवाइयों पर TCS में कटौती

  • सरल टैक्स कंप्लायंस

  • Foreign Asset Disclosure Window

  • Integrated Digital Cargo Clearance System

इसका उद्देश्य निवेश और व्यापार के लिए विश्वास आधारित वातावरण तैयार करना है।


राजकोषीय दृष्टिकोण (Fiscal Outlook)

सरकार ने वित्तीय घाटे को 2026–27 में 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। ऋण-जीडीपी अनुपात को मध्यम अवधि में 50%  (Debt-to-GDP Ratio: 55.6%) के आसपास लाने की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए राज्यों को 41% कर-हिस्सेदारी देना सहकारी संघवाद को सुदृढ़ करता है।


निष्कर्ष: Geo-Economics के नजरिए से

केंद्रीय बजट 2026–27 किसी तात्कालिक लोकलुभावन उपाय के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण का दस्तावेज है। यह बजट यह संकेत देता है कि भारत विकास, राजकोषीय अनुशासन और समावेशी नीति के संतुलन के साथ विकसित भारत @2047 की दिशा में अग्रसर है।

यह बजट भारत को:

  • वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब

  • सेवा आधारित ज्ञान अर्थव्यवस्था

  • और 2047 तक विकसित राष्ट्र  बनाने की दिशा में आगे बढ़ाता है।

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